यहाँ अहं को विसर्जित करती हूँ, इसलिए मैं शून्य हूँ... यहाँ अहं को विसर्जित करती हूँ, इसलिए मैं शून्य हूँ...
क्या भारी कदमों से कोई मंजिल को छू भी पाएगा। क्या भारी कदमों से कोई मंजिल को छू भी पाएगा।
उसे कैंसर है, ये सुन कर उसके हाथ कंपकपाएं थे! उसे कैंसर है, ये सुन कर उसके हाथ कंपकपाएं थे!
नहीं चाहिए कोई धन दौलत मुझे जीना है मुझे बस तेरे लिए। पाया बड़ी मन्नतों से तुझे रब ने बन... नहीं चाहिए कोई धन दौलत मुझे जीना है मुझे बस तेरे लिए। पाया बड़ी मन्नतों...
खुशियों का सौदा कर बैठे। खुशियों का सौदा कर बैठे।
रोज़ डे आए आकर चले गए रोज के जैसे। रोज़ डे आए आकर चले गए रोज के जैसे।